‘जी.डी. गोयनका स्कूल’ की ‘दिविजा’ ने 10वीं इंग्लिश में 100/100 लाकर रचा इतिहास,
‘जी.डी. गोयनका स्कूल’ की ‘दिविजा’ ने 10वीं इंग्लिश में 100/100 लाकर रचा इतिहास,
94% अंकों के साथ बढ़ाया उत्तराखंड का गौरव
वर्ल्ड मीडिया न्यूज़
रुद्रपुर। उत्तराखंड के रुद्रपुर शहर से एक बार फिर प्रतिभा की ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश को गर्व से भर दिया है। ‘जी.डी. गोयनका स्कूल’ की होनहार छात्रा दिविजा ने सीबीएसई बोर्ड की 10वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल कुल 94 प्रतिशत अंक हासिल किए, बल्कि इंग्लिश विषय में 100 में से 100 अंक लाकर एक नया इतिहास भी रच दिया। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।
दिविजा की यह सफलता केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार, स्कूल और शिक्षकों के संयुक्त सहयोग और मार्गदर्शन का भी प्रतिफल है। रुद्रपुर जैसे शहर से निकलकर इस तरह का उत्कृष्ट प्रदर्शन करना यह दर्शाता है कि आज छोटे शहरों के बच्चे भी बड़े सपनों को साकार करने की क्षमता रखते हैं। दिविजा की उपलब्धि से पूरे उत्तराखंड में खुशी और गर्व का माहौल है।
दिविजा के परिवार की बात करें तो उनके पिता राकेश कुमार सरकार एक शिक्षित और प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने आईआईटी खरगपुर से इंजीनियरिंग की है और वर्तमान में पंतनगर स्थित सिडकुल में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत हैं। वहीं उनकी माता गायत्री सरकार B.Ed. डिग्री धारक हैं और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं। ऐसे शैक्षणिक वातावरण में पली-बढ़ी दिविजा को शुरू से ही पढ़ाई और अनुशासन का महत्व समझ में आया, जिसने उनकी सफलता की मजबूत नींव रखी।
दिविजा का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति लगन और मेहनत के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, तो दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। उनका यह आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही उन्हें अन्य छात्रों से अलग बनाता है। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें न केवल एक सफल छात्रा के रूप में स्थापित किया है, बल्कि आने वाले छात्रों के लिए एक प्रेरणा भी बना दिया है।
भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए दिविजा ने बताया कि वह आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहती हैं और समाज की सेवा करना चाहती हैं।
दिविजा का मानना है कि आज के समय में समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है, खासकर गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए। उनका कहना है कि अक्सर देखा जाता है कि कई लोग सिर्फ इस वजह से अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि उन्हें समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता या फिर आर्थिक तंगी के कारण वे अच्छे डॉक्टर और अस्पताल तक पहुंच ही नहीं पाते। यह स्थिति उन्हें अंदर तक झकझोर देती है और यही सोच उनके जीवन का लक्ष्य बन चुकी है।
दिविजा आगे बताती हैं कि वह डॉक्टर इसलिए नहीं बनना चाहतीं कि केवल पैसा कमा सकें, बल्कि उनका सपना एक ऐसा डॉक्टर बनने का है जो जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की किरण बन सके। उनके अनुसार, डॉक्टर होना केवल एक पेशा नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है—एक ऐसा दायित्व जिसमें किसी की जिंदगी को बचाना सबसे बड़ा धर्म होता है। वह चाहती हैं कि समाज का हर व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या गरीब, उसे समान रूप से बेहतर इलाज मिल सके और कोई भी सिर्फ इलाज के अभाव में अपनी जान न गंवाए।
उनकी सोच में समाज सेवा की भावना साफ झलकती है। दिविजा का मानना है कि अगर हर डॉक्टर अपने पेशे को केवल कमाई का जरिया न मानकर सेवा का माध्यम बनाए, तो देश में स्वास्थ्य व्यवस्था काफी हद तक बेहतर हो सकती है। वह भविष्य में ऐसे अस्पतालों और सेवाओं से जुड़ना चाहती हैं, जहां गरीबों को भी सम्मान और संवेदनशीलता के साथ इलाज मिले।
एक जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में दिविजा समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहती हैं। उनका सपना है कि वह अपने ज्ञान, मेहनत और समर्पण के बल पर न केवल एक सफल डॉक्टर बनें, बल्कि एक ऐसा उदाहरण भी प्रस्तुत करें, जिससे और लोग भी समाज सेवा के लिए प्रेरित हों। उनके विचार यह दर्शाते हैं कि आने वाली पीढ़ी सिर्फ अपने भविष्य के बारे में नहीं सोच रही, बल्कि समाज और देश के बेहतर कल के लिए भी संकल्पित है।
उनका यह सपना केवल एक करियर लक्ष्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता को भी दर्शाता है।
अपनी सफलता का श्रेय देते हुए दिविजा ने अपने माता-पिता और स्कूल के शिक्षकों को विशेष रूप से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सही दिशा-निर्देशन के बिना यह सफलता संभव नहीं थी। उनका मानना है कि अगर इसी तरह से शिक्षकों का सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहा, तो वह भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगी और देश का नाम रोशन करेंगी।
दिविजा की यह सफलता केवल एक परीक्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है-मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और यह साबित करेगी कि सपनों को सच करने के लिए बस एक मजबूत इरादा ही काफी होता है।

