बाबासाहेब के विचारों को अपनाने का लिया गया संकल्प
समता सैनिक दल का अनोखा आयोजन: खीर वितरण से दिया भाईचारे का संदेश
अंबेडकर जयंती: समानता और न्याय का प्रतीक दिवस
फ्यूचर टीवी
भारत के इतिहास में कुछ महान व्यक्तित्व ऐसे हुए हैं जिन्होंने समाज की दिशा और दशा दोनों को बदलकर रख दिया। ऐसे ही महान विचारक, समाज सुधारक और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम अत्यंत सम्मान और गर्व के साथ लिया जाता है। हर वर्ष 14 अप्रैल को उनकी जयंती पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणा के साथ मनाई जाती है। यह दिन केवल एक महापुरुष के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि सामाजिक समानता, न्याय और अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।
इसी पावन अवसर पर 14 अप्रैल 2026 को झील के सामने संडे भारती समाचार पत्र के कार्यालय में ‘समता सैनिक दल’ द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में खीर वितरित कर समाज में भाईचारे, प्रेम और समानता का संदेश दिया गया। यह आयोजन अपने आप में एक अनूठी पहल थी, क्योंकि इसमें सभी वर्गों के लोगों को एक साथ बैठाकर, बिना किसी भेदभाव के, एक ही प्रसाद को ग्रहण कराया गया। यह दृश्य वास्तव में डॉ. भीमराव अंबेडकर के उस सपने को जीवंत करता है, जिसमें समाज के हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान मिले।
‘समता सैनिक दल’ एक ऐसा संगठन है जो डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और आदर्शों से प्रेरित होकर कार्य करता है। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त भेदभाव, छुआछूत और असमानता को समाप्त करना है। अंबेडकर जयंती को विशेष रूप से मनाने के पीछे भी यही उद्देश्य छिपा होता है कि लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए और समाज को एक समतामूलक दिशा में आगे बढ़ाया जाए। खीर वितरण जैसे सरल लेकिन प्रभावशाली माध्यम के जरिए संगठन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि जब तक हम सभी एक साथ बैठकर समानता का अनुभव नहीं करेंगे, तब तक सच्चे अर्थों में सामाजिक बदलाव संभव नहीं है।
कार्यक्रम में ‘समता सैनिक दल’ के कई प्रमुख पदाधिकारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष गोपाल सिंह गौतम, प्रदेश सचिव राजेश कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष आर्यन डोरे, जिला अध्यक्ष गोपाल भारती, जिला उपाध्यक्ष गोपाल शर्मा, नाथू लाल तथा हिंदी ‘वर्ल्ड मीडिया न्यूज़’ समाचार पत्र के संपादक शुभोधुती कुमार मंडल प्रमुख रूप से शामिल थे। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखते हुए डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया और समाज में समानता स्थापित करने का आह्वान किया।
अगर हम बात करें कि अंबेडकर जयंती क्यों मनाई जाती है, तो इसका उत्तर डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन संघर्ष में छिपा हुआ है। उन्होंने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों और भेदभाव का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और समाज के पिछड़े एवं वंचित वर्गों को अधिकार दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष किया। भारतीय संविधान का निर्माण कर उन्होंने देश के हर नागरिक को समान अधिकार, स्वतंत्रता और न्याय प्रदान किया। यही कारण है कि उनका जन्मदिन आज एक राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।
आज के समय में जब समाज में कई प्रकार की असमानताएं और भेदभाव देखने को मिलते हैं, तब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका यह संदेश कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी हर व्यक्ति के लिए मार्गदर्शक है। ‘समता सैनिक दल’ द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि एक प्रेरणा भी था, जो समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करता है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनते हैं। जब लोग एक साथ मिलकर, बिना किसी भेदभाव के, प्रेम और सम्मान के साथ कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, तभी सच्चे अर्थों में डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपनों का भारत साकार हो सकता है। ‘समता सैनिक दल’ का यह प्रयास वास्तव में समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है, जो आने वाली पीढ़ियों को समानता, एकता और मानवता का सच्चा पाठ सिखाता है।

